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Feb 28 · 7 min read

अपने करीबी रिश्तेदारों अथवा मित्रों को पैसे उधार देना आपके लिए एक मुश्किल निर्णय हो सकता है। तार्किक दृष्टि से देखा जाए तो आपको कभी भी उतने पैसे उधार नहीं देने चाहिए जितना आप खोने का खतरा नहीं उठा सकते।

परिवार के सदस्यों या मित्रों को पैसे उधार देने का फैसला तो पूर्ण रूप से आप पर निर्भर करता है परन्तु फिर भी यह निर्णय करते समय समझदारी से विचार करना ज़रूरी है।

उधार देने में समझदारी दिखायें

आम तौर पर भारत में व्यक्तिगत ऋण अक्सर मित्रों अथवा परिवार से लिए जाते हैं। ऐसा भी देखा गया है कि यह ऋण ज़्यादातर अदा नही किये जाते है। चाहे उधार राशी कितनी भी छोटी हो अथवा आपके आपके मित्र या सम्बन्धी आपके कितने भी करीब क्यों न हों, आपके उधर में दी गई राशी आपकी मेहनत की कमाई है, अतः इसे देने अथवा न देने का आपको पूरा अधिकार आपके पास है।

इसलिए, यदि आप किसी को पैसे उधार देने का निर्णय करते हैं तो सर्वप्रथम इस समझौते को लिखित रूप में सुरक्षित करने का सुनिश्चय करें। उधार देने के पहले कुछ न्यायिक प्रक्रियाओं को पूरा करना बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसके साथ ही सभी नियम और शर्तावली स्पष्ट रूप में लिखित स्वरूप में आपके पास उपलब्ध होनी चाहिए। उधारकर्ता को सभी शर्तें जैसे उधार की राशी, ऋण अदा करने की अवधि, तथा क़िस्त की राशी का पूरा ज्ञान होना आवश्यक है। इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करते समय कम से कम दो गवाहों का वहाँ उपस्थित होना भी ज़रूरी है।

शर्तों तथा नियमों पर विचार- विमर्श करना दोनों पक्षों के लिए एक नाज़ुक स्थिति हो सकती है। परन्तु आने वाली संभावित बुरी स्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह अत्यंत आवश्यक है। यदि उधार करता देरी से ऋण का भुगतान करता है, अथवा बिलकुल भी भुगतान नहीं करता, तो इस स्थिति में आपकी तरफ से उठाये जाने वाले कदम जैसे जुर्माना, ऋण की राशी वसूल करने की प्रक्रिया, अथवा कोई कानूनी कार्यवाही, — इन बातों पर पहले से बातचीत करना बहुत आवश्यक है। इन सब चीज़ों से इस व्यापारिक संबध के लिए मापदंड तय करने में आसानी होगी तथा दोनों पक्षों को पूर्ण रूप से ज्ञान होगा कि द्वेषपूर्ण स्थिति में क्या किया जाना चाहिए।

इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि किसी और की सहायता करते करते आपकी जेब पूरी तरह खाली न हो जाए, यह ज़रूरी है कि आप एक प्रतिज्ञा पत्र लिखवाकर उसे प्रमाणित करा लें। ख़ास तौर पर तब जब उधार की राशी बहुत अधिक हो।

आप ब्याज भी ले सकते हैं

स्वयं को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना सबसे ज्यादा आवश्यक है और अपनी उधार राशी पर ब्याज वसूलना एक बहुत ही अच्छा तरीका है। हो सकता है कि यह आपको अनावश्यक अथवा लोभी प्रस्ताव लगे, परन्तु विचार करें यदि इस उधार दी गई राशी का आपने किसी और प्रकार निवेश किया होता तो निश्चित ही आपको इसपर ब्याज मिलता।

एक और बात सोचें कि यदि उधारकर्ता ने बैंक से ऋण लिया होता तो उन्हें निश्चित स्वरुप से ब्याज भरना ही पड़ा होता। अतः उधार पर ब्याज वसूलना है या नहीं, यह पूर्ण रूप से आप पर निर्भर करेगा तथा इसमें वे कुछ नही कह सकते।

कई लोग अपने प्रियजनों द्वारा लिए गए उधार पर ब्याज नहीं लगाना चाहते और यह भी ठीक है। परन्तु, यदि आप ब्याज लगाना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं की आप अपने अनुसार या तो उचित ब्याज दर कर निर्धारण कर सकते हैं अथवा ऋण पर ऊँचे दर से भी ब्याज लगा सकते हैं।

सबसे बुरी स्थिति के लिए हमेशा तैयार रहें

यदि आप अपने मित्रों या परिवारजनों को उधार देना चाहते हैं तो आने वाली बुरी स्थितियों के बारे में उनसे खुल कर बातचीत करें। आगे चल कर ऐसा भी हो सकता है कि वे ऋण का भुगतान करने में असमर्थ हों और आपको किसी आपात स्थिति में नकद की आवश्यकता हो। ऐसे में उधार का भुगतान करने के लिए अन्य योजनायें जैसे संग्रह प्रक्रियाओं अथवा कानूनी शुल्क पर उनसे बात करें।

यदि लिखित दस्तावेज़ में कथित शर्तों के अनुसार उधारकर्ता भुगतान नहीं करता, तो उनकी समस्या पर सर्वप्रथम विचार करें। क्या पता कि भुगतान की अवधि बढ़ाना अथवा किस्तों की रकम घटाना इस समस्या का हल हो। परन्तु यदि ऐसा अक्सर होता है या वे उधार चुकाने से मन कर देते हैं तो आपको कानूनी कार्यवाई करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।

मान लें कि आपने एक लाभार्थी को १ लाख रुपये नकद उधार दिया है। फिर उसके पश्चात उधारकर्ता आपके फ़ोन अथवा मेसेज का उत्तर नहीं दे रहा तथा धर की राशी का भुगतान बिलकुल नहीं कर रहा। फिर आप रिकवरी एजेंट्स अथवा अन्य सेटलमेंट के प्रयासों से अपनी उधार दी गई राशी पुनः प्राप्त कर सकते हैं। कई बार देखा गया है कि उधारकर्ता मामले को अधिक खींचने के लिए रिन्दाताओं को झूठे मुकदमों में फंसा देते हैं। कई बार उधार करता स्वयं को दिवालिया घोषित करने के पहले अपनी संपत्ति को किसी और के नाम कर देते हैं। यदि ऐसी स्थितियां आयें, तो इस प्रकार के लेन-देन को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखकर इस पर सख्त कानूनी कार्यवाई की जा सकती है।

ना कहने में कोई बुराई नहीं है

यदि उधार की रकम आपके बजट के बहार है, तो आप साफ़ साफ़ अपने परिजन को उधार देने से मना कर सकते हैं। यदि आपकी किसी भी परिवारजन अथवा मित्र को उधार न देने की नीति है तो उसपर अडिग रहे। यदि कोई परिवार का सदस्य अडिग है तो कभी कभी आपको चतुराई दिखाकर यह भी कहना पड़ सकता है कि आप उन्हें पैसे उधार नहीं दे सकते क्योंकि इस तरह ही आपने बहुत से मूल्यवान रिश्ते खोये हैं।

ऐसी स्थितियों के लिए हमेशा एक अच्छा उत्तर पहले से तैयार रखना बेहतर है ताकि आपको सिरे पर आकर सोचना न पड़े। ऐसे में कई बार अक्सर इंसान ना की जगह हाँ में उत्तर दे जाता है। ना कहने का पहले से अभ्यास करें ताकि यदि आपका कोई मित्र आपसे पैसे उधार लेने की बात करता है तो आप साफ़-साफ़ उसे मन कर सकें।

किसी और प्रकार से उनकी सहायता करें

कई परिस्थितियों में उधार देना ही किसी की सहायता करने का एकमात्र तरीका नहीं होता। आप अपने प्रियजन की समस्या को अच्छी तरह से समझ कर किसी और प्रकार से उनकी सहायता कर सकते हैं जो नकद राशि से सम्बंधित न हो। यदि वे अक्सर ही ऐसी परेशानियों से जूझते हुए नज़र आते हैं, तो बेहतर होगा की आप उन्हें निवेश तथा वित्त सम्बन्धी अच्छी सलाह दें।

आप उन्हें एक बजट निर्धारित करने में सहायता कर सकते हैं ताकि वे फिजूल खर्ची से बच सकें। यदि आपकी आर्थिक स्थिति अनुमति देती है तो आप उनकी कार की किस्तें चुकाने में योगदान कर सकते हैं। परन्तु इसे उनकी आदत न बनाएं। इससे बेहतर है की आप उनके लिए फाइनेंस कराएं। वे भले ही आपके प्रयासों की अभी सराहना न करें परन्तु आगे चल कर इसका उन्हें काफी लाभी मिलेगा।

भावनाओं में बहने से बचें- स्वार्थी होना गलत नहीं है

यदि आपके मित्र या परिवार के सदस्य को पैसे की आवश्यकता होती है तो इसके लिए मन कर पाना बहुत मुश्किल है। परन्तु याद रखें कि आप चाहें कितने भी करीब क्यों न हों, कभी कभी चीज़ें सोच के मुताबिक़ नहीं जाती। तथा यदि वे आगे चलकर उधार की राशी चुकाने में असमर्थ होते हैं, तो इससे आप दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ जायेगी।

अगर उधार देना आपके लिए एक असहज स्थिति है तो अपने मित्र की समस्याओं का अच्छी प्रकार आंकलन करें तथा यह जानने का प्रयास करें कि आप किन बेहतर तरीकों से उनकी सहायता कर सकते हैं। आप विनम्रता पूर्वक उधार के प्रस्ताव को ठुकरा सकते हैं। यह भी हो सकता कि उन्हें सिर्क भावनात्मक सहारे या फिर अच्छी वित्तीय सलाह की आवश्यकता हो। यदि वे इच्छुक हैं तो आप नकद के अतिरिक्त भी जितना आपके लिए संभव है उतने प्रयास कर उनकी सहायता कर सकते हैं।

हालांकि, यदि आप अपने प्रियजनों को उधार देने का निर्णय कर चुके हैं, तो ज़रूरी है कि आप भुगतान की शर्तों को अछे से परिभाषित करके आप स्वयं को सुरक्षित करें। यदि आप इस दुविधा में हैं की आपको अपने मित्र की नकद के माध्यम से सहायता करनी चाहिए अथवा किसी और प्रकार से उसका मार्गदर्शन करना चाहिए, दोनों ही स्थितियों में अपने भावनाओं को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।


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