चित्र प्रदर्शनी: सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रकटन एवं कार्य और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का विकास
प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की थी, “देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ!” (प्रकाशितवाक्य 22:7)।(© BSI) “क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा” (मत्ती 24:27)।(© BSI) “क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दु:ख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ” (लूका 17:24–25)।(© BSI) “जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है” (प्रकाशितवाक्य 2:7)।(© BSI) आज, प्रभु यीशु की ये सारी भविष्यवाणियाँ पूरी हो गई हैं। ऐसे बहुत से लोग जिनमें परमेश्वर के प्रकटन की चाह है, जिनमें प्रभु यीशु के बादल पर आने की तड़प है, उन्होंने परमेश्वर की वाणी को सुना है, और उन्हें परमेश्वर के सिंहासन के सामने आरोहित किया गया है। 1991 में, विश्व के पूर्वी भाग, चीन में, एक मनुष्य के पुत्र ने, सूर्योदय से पहले की अंधेरी रात की ख़ामोशी को चीरते हुए, और चीन के विभिन्न ईसाई सम्प्रदायों को झकझोरते हुए, वचन बोलना आरंभ किया। लोग ख़ुशी से पागल होकर, एक-दूसरे को यह बात बताने के लिए दौड़े, लोग गवाही देने लगे कि प्रभु यीशु लौट आया है और परमेश्वर ने वचन बोलना आरंभ कर दिया है। महज़ एक दशक में, मनुष्य के पुत्र के कथन पूरे मुख्यभूमि चीन में फैल गये, जो कि चीन में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रकटन और कार्य था। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य ने न सिर्फ़ मुख्यभूमि चीन में सनसनी फैला दी, बल्कि बाकी दुनिया को भी झकझोर दिया। सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त लाखों वचन इंटरनेट के ज़रिये अलग-अलग देशों के लोगों के लिये उपलब्ध करा दिये गये हैं। परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की चाह रखने वाले बहुत से लोगों ने वचनों की खोज और जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। इसने विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का भी ध्यान आकर्षित किया है। अक्टूबर 2018 के उत्तरार्द्ध में, दक्षिण कोरिया के सियोल में स्थित सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया (कैग) में एक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसका शीर्षक था “सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रकटन और कार्य।” इसने एक दर्जन से भी ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त विशेषज्ञों और विद्वानों का ध्यान खींचा ताकि वे आकर जाँच-पड़ताल करें। कलीसिया के ईसाइयों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों और कार्यों का अनुभव करने के बाद, अपनी भावनाओं और अंतर्दृष्टि को मेहमानों के सामने रखा।
