आगे सफर था और पीछे हमसफर
Sep 7, 2018 · 1 min read

आगे सफर था और पीछे हमसफर..
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर..
मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते….
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता…
