तुमने चाहा ही नहीं…
Sep 7, 2018 · 1 min read
तुमने चाहा ही नहीं ,ये हालात बदल सकते थे,
तुम्हारे आँसू मेरी आँखों से भी निकल सकते थे…
तुम ने समझा ही नहीं मेरी वफ़ा की कीमत को,
वरना नरम लफ्ज़ो से तो पत्थर भी पिघल सकते थे…
तुम ने चाहा ही नहीं इश्क़ चाहने वालों की तरह,
दिल तो क्या हम रूह में भी उतर सकते थे…
तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह बस,
दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।

