भाजपा की अवसरवादी नैतिकता

एक महिला अपने बच्चे द्वारा ज्यादा मीठा खाने से परेशान होकर महात्मा गाँधी जी के पास आयी और बच्चे को समझाने के लिए निवेदन किया| गाँधी जी ने उस महिला को एक सप्ताह बाद आने के लिए कहा , मालूम है क्यों ? क्योंकि उस समय गाँधी जी स्वयं मीठा खाते थे और किसी को भी मीठा न खाने की सलाह देने से पूर्व उन्होंने खुद मीठा छोड़ना आवश्यक समझा - ये महात्मा गाँधी के आदर्श थे, जिनसे उन्होंने कांग्रेस पार्टी को सींचा था| स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर अब तक तमाम कांग्रेस सरकारों ने महात्मा गाँधी जी के सत्य, करुणा , अहिंसा, त्याग, साधना और संघर्ष जैसे आदर्श मार्गों का अनुसरण किया है| महात्मा गाँधी जी का नाम लेकर सत्ता पर काबिज होने वाली भाजपा आज उनके तमाम आदर्शों की बलि चढ़ाकर दूसरे दलों को नैतिकता का पाठ पढ़ा रही है| जिनके घर शीशे के होते हैं उनको दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए | आज देश की लोकतांत्रिक आत्मा भाजपा की इस अवसरवादी नैतिकता की भेंट चढ़कर खंडित हो चुकी है|

आज कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी होने की दुहाई देकर सत्ता हथियाने का प्रयास कर रही भाजपा को हाल ही में अपनी सियासी चालबाजियों को याद करने की आवश्यकता है, क्योंकि देश उन चालबाजियों को भूलने वाला नहीं है| भाजपा को यह बिलकुल नहीं भूलना चाहिए कि उसने सत्ता का दुरुपयोग करके गोवा में जनादेश का अपमान किया और सबसे बड़े राजनैतिक दल कांग्रेस को सत्ता से दूर करने का षड़यंत्र किया| साथ ही, भाजपा को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उसने किस तरह मेघालय में मात्र दो सीटें होने के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मान-मर्दन करते हुए सरकार बनायी| भाजपा ने सत्ताबल के आधार पर यहां भी सबसे बड़े राजनैतिक दल कांग्रेस को सत्ता से दूर करने का कुचक्र रचा| भाजपा भले ही भूल जाए लेकिन देश की जनता को याद है कि उसने मणिपुर में किस तरह से संविधान की मूल भावना का अपमान करते हुए सत्ता हासिल की थी- एक बार फिर से सबसे बड़े राजनैतिक दल कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखकर| बिहार में भाजपा की सियासी चालबाजियों को कौन भूल सकता है, जब उसने राजद और कांग्रेस के चुनाव पूर्व गठबंधन के संख्याबल को धता बताकर राज्यपाल के संवैधानिक पद के दुरुपयोग के जरिए दूसरे नंबर के राजनैतिक दल जदयू के साथ सरकार बनाने का षड़यंत्रकारी कार्य किया था| यह सर्वविदित है कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश की लोकतांत्रिक सरकारों को असंवैधानिक तरीके से अस्थिर करके सत्ता हथियाने के घिनौने खेल में भाजपा को माननीय न्यायालय के दखल के बाद मुंह की खानी पड़ी थी|

भाजपा सरकार के कुकृत्यों के ये चंद उदाहरण हैं जिनके चलते भारत का लोकतांत्रिक राजनैतिक पटल कलंकित हुआ है| भाजपा द्वारा 2014 में सत्तारूढ़ होने के बाद से लगातार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उललंघन और संविधान का अपमान किया गया| चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने से लेकर आचार संहिता के उल्लंघन तक; खान-पान पर पाबंदी से लेकर धार्मिक भेदभाव तक; घृणित विचारों के संरक्षण से लेकर न्यायपालिका पर दबाव बनाने वाली भाजपा द्वारा कर्नाटक चुनाव परिणाम के संदर्भ में नैतिकता की दुहाई देना हास्यास्पद है| भाजपा ने अपने इर्द-गिर्द सत्ता के दुरुपयोग, षड़यंत्र और अनियमितताओं का ऐसा आवरण तैयार कर लिया है जो अंततः उसी के लिए घातक सिद्ध हो रहा है, क्योंकि जनता जाग उठी है और जनता जान भी चुकी है|

Like what you read? Give Indian National Congress a round of applause.

From a quick cheer to a standing ovation, clap to show how much you enjoyed this story.