महत्वपूर्ण सवालों पर राहुल गांधी का जवाब

कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने जर्मनी और लंदन के दौरे के दौरान छात्रों, पत्रकारों, कारोबारियों, इंडियन ओवरसीज कांग्रेस सहित विभिन्न समुदायों के साथ बातचीत की। श्री गांधी ने कई महत्वपूर्ण मसलों पर बात की जो भारत में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक माहौल को तय करते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मुद्दों में नौकरियां, किसान, विदेश नीति, सरकार के भीतर असामाजिक तत्व आदि शामिल थे। हालांकि, ऐसा लगता है कि मीडिया को केवल एक चीज से दिलचस्पी थी, जो एक पत्रकार द्वारा 1984 के सिख दंगों पर पूछे गए सवाल का जवाब था।

कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी से ये सवाल कई बार पूछा गया और उन्होंने इसका जवाब देने से कभी कोई गुरेज भी नहीं किया। 2014 में एक साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों में कुछ कांग्रेसजन भी शामिल थे। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी दोनों ने ही इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और श्री गांधी ने भी दोनों नेताओं की भावनाओं को साझा किया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने बार-बार प्यार की राजनीति में विश्वास को दोहराया है नफरत की नहीं। उन्होंने ने कभी किसी के गलत काम का दोष पूरे समुदाय पर नहीं डाला और हमेशा कानूनी कार्यवाही के जरिये पीड़ितों को न्याय दिलाने की हिमायत की है।

लंदन दौरे के दौरान इसी मुद्दे पर एक सवाल उठाया गया था, जिसे भारतीय मीडिया द्वारा गलत तरीके से पेश किया गया। अंबानी के स्वामित्व वाले समूह सीएनएन के एक रिपोर्टर द्वारा उठाए गए सवाल को दुर्भावनापूर्ण मंशा से पूछा गया था। यदि थोड़ी गहराई से देखा जाये तो कांग्रेस नेताओं को नोटिस देना ही पर्याप्त नहीं था, श्री अंबानी ने कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा रफेल मुद्दे पर लगातार घेरने के कारण अपने एक रिपोर्टर को श्री गांधी पर सीधा हमला करने के लिये लंदन भेजा था। पूछे गये सवाल में इस तथ्य का जिक्र नहीं किया गया था कि 1984 के दंगों के लिये 442 लोगों को दोषी ठहराया गया था।

सच्चाई ये है कि कांग्रेस पार्टी ने न तो दंगा कराया और न ही उसकी इसमें कोई भूमिका थी, लेकिन इसमें कुछ ऐसे लोग जरुर शामिल थे जो पार्टी के सदस्य भी थे। इस तथ्य के बावजूद श्री राहुल गांधी ने कानून को अपना काम करने देने की वकालत की। श्री गांधी से सवाल पूछते समय हर किसी को ये जरुर पता होना चाहिए कि 2002 में गुजरात में राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित दंगे हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, जो अब प्रधानमंत्री की भूमिका में हैं, ने दंगों में अपनी भूमिका का कभी कोई जवाब नहीं दिया। जबकि श्री गांधी ने कभी भी इस गंभीर मुद्दे से बचने की कोशिश नहीं की। जबकि, एक बार जब मोदी जी से इस बारे में बात करने की कोशिश हुई तो वो मात्र तीन मिनट में साक्षात्कार बीच में ही छोड़कर चले गये। 2002 के दंगों पर उनका कोई जवाब न होने का एक और कारण ये है कि उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद से पिछले 4 सालों में खुले तौर पर कभी मीडिया को संबोधित नहीं किया। क्या प्रधानमंत्री मोदी इन सवालों का कोई जवाब देंगे या फिर इस लड़ाई को लड़ने के लिए किसी और ‘अमीर’ दोस्त से कहेंगे?

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