मधुशाला — हिंदी भाषा का अद्भुत काव्य

बहुत कम लोगों को मालुन होगा कि स्कूल के समय, मैं कविता लिखता था । मैंने १५-२० हिंदी कविताएं लिखी है लेकिन महाविद्यालय के समय मैंने कविताएं लिखना छोड़ दिया था। मेरे को कनाडा में रहते हुए १३ वर्ष हो गए परन्तु मेरा हिंदी और हिंदी कविताएं के प्रति प्रेम आज भी उतना ही है।

मधुशाला का मैंने काफी नाम सुना था और YouTube पे मैंने काफी videos देखे है। मुख्यतः अमिताभ बच्चन के द्वारा मधुशाला का वाचन। तो मैंने इस पुस्तक का Flipkart पे २०१७ में ख़रीदा था। Startup की इस आपाधापी में इसका रसपान करने का मौका ही नहीं मिला। लेकिन आज, शुक्रवार की रात, मैंने मन बना लिया कि इसका पाठ किया जाए!

Madhshala by Harivansh Rai Bachchan

पुस्तक परिचय

मधुशाला का कौन नहीं जानता! लेकिन नयी पीढ़ी कि जानकारी के लिए बता दूँ। यह हिंदी के प्रसिद्ध कवी हरिवंश राय बच्चन का काव्य है। उन्होंने इस कविता का १९३५ लिखा था। इसमें कुल १३५ रूबाई (चार पंक्तियों वाली कविताये) है वह इसके कुल ७५ पन्ने है। मैंने यह किताब Flipkart से ली है लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि यह भारत के किसी भी स्थानीय पुस्तकालय या फिर पुस्तक भंडार में मिल जाएगी। अगर आप को पुस्तक नहीं खरीदनी है या फिर आप ऑनलाइन पढ़ना पसंद करते है तो आप इस पूरी कविता को यहाँ पे पढ़ सकते है: https://kaavyaalaya.org/mdhshla

मेरे विचार

पूरा काव्य में इन ४-५ शब्दों के इर्दगिर्द सारी रूबाइयां लिखी हुई है और आप को इन शब्दों के अर्थ पता होना चाहिए, अनन्यथा आप के समझ के परे होगी:

मधु, मदिरा, हाला — शराब

साकी, साकीबाला — शराब परोसने वाली

प्याला — कप या ग्लास

मधुशाला, मदिरालय — जहा शराब परोसी जाती है

आप को यह जानकर आश्चर्य होगा की हरिवंश राय बच्चन ने कभी शराब नहीं पीई लेकिन मधुशाला को उन से अच्छा आजतक कोई नहीं समझा है।

मैंने काव्य का पूरा आनंद आया। लगभग दो घंटे में मैंने पूरी किताब पढ़ डाली। मेरे को काफी हिंदी शब्द आते थे लेकिन जो नहीं आते थे उनको इंटरनेट पे देख के समझना पड़ा।

मैं सभी को सलाह दूँगा की जीवन एक बार मधुशाला को पढ़े।

वैसे कुमार विश्वास की आवाज़ में मधुशाला का वाचन मेरा सबसे पसंदीदा है। आप इसको यहाँ सुन सकते है: https://www.youtube.com/watch?v=4yd0zSQ0GhQ

मेरे पसंदीता रूबाई (पद्य):

सारी रूबाइयां एक से बढ़ के एक है लेकिन मेरी निम्नलिखित पांच प्रिय रुबाइयाँ है।

एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनियावालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला।।२६।

सजें न मस्जिद और नमाज़ी कहता है अल्लाताला,
सजधजकर, पर, साकी आता, बन ठनकर, पीनेवाला,
शेख, कहाँ तुलना हो सकती मस्जिद की मदिरालय से
चिर विधवा है मस्जिद तेरी, सदा सुहागिन मधुशाला।।४८।

मुसलमान औ’ हिन्दू है दो, एक, मगर, उनका प्याला,
एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला,
दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मन्दिर में जाते,
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला!।५०।

कभी न सुन पड़ता, ‘इसने, हा, छू दी मेरी हाला’,
कभी न कोई कहता, ‘उसने जूठा कर डाला प्याला’,
सभी जाति के लोग यहाँ पर साथ बैठकर पीते हैं,
सौ सुधारकों का करती है काम अकेले मधुशाला।।५७।

दर दर घूम रहा था जब मैं चिल्लाता — हाला! हाला!
मुझे न मिलता था मदिरालय, मुझे न मिलता था प्याला,
मिलन हुआ, पर नहीं मिलनसुख लिखा हुआ था किस्मत में,
मैं अब जमकर बैठ गया हूँ, घूम रही है मधुशाला।।११८।