thinking it loud
दोस्तों का काफ़िला यूं ही बढ़ता जाता हैमुझको अजनबियों से बातें करना अच्छा लगता हैअक्सर कोई कहानी या किस्सा सुनाता हैऔर फ़िर मुझे वो जाना पहचाना…
इंतज़ार, थमा सा दरवाज़े परनमी, रूकी सी पलकों के किनारों परऐ ख़्वाबों, मुझको और कितना जगाओगेजाओ, उन्ही से पूछो कि तुम कब आओगे
याद जाती ही नहींसिर्फ़ आती है और फिर आती ही रहती है
हर दिन किसी लड़की की इज्ज़त लूटी जाती है हम मोमबत्तियाँ जलाते हैं शर्मसार होते हैं कभी लड़की को तो कभी उसके घरवालों को दिलासा देते हैं नारे लगाते…
नक़ाब के पीछे एक चेहरा तलाश रही हूँवो धड़कन जो मेरी धड़कनों के साथ सुर मिला सके उस दिल को खोज रही हूँमैं नकाबों की इस भीड़ में एक इंसान ढूंढ रही हूँ
कहीं किसी दुकान पर, कॅम्पस में या यूं ही आवाजाही मेंगोलियां आजकल सरे आम चलती हैंकुछ लोग कुछ लोगों को मारते हैं, ढेरों गोलियाँ चलाते हैं, लाशें…