गौतम बुद्ध


एक पल
एक गौतम
इतना भावुक, इतना कोमल
सह ना सका जो उसने देखा एक वृद्ध, एक शव
बहने लगे उसके आँसू ठहर गए उसके पाँव

दूसरे पल वही गौतम
हुआ दृढ़, हुआ मज़बूत
सोचा नहीं उसने एक पल भी
पकड़ ली उसने वैराग्य की राह अदभूत

त्याग दिया एक पल में घर संसार
निकल पड़ा उस राह पर
जिस राह कोई था न गया
जो किसी ने था न पाया
ज्ञान वो पा गया,
वही बुद्ध कहलाया

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