बबूल


लोग बबूल को काँटों से जानते हैं
किसी को क्या पता
प्यार दो अगर तो
बबूल भी फ़ूल बरसाते हैं
गरम रेत जिसके तले
आसपास जिसके लू चले
लेकिन सपने देखना ये कभी ना भूले
इसीलिए तो इस रेगिस्तान में भी ऐसा खिले
लोग बबूल को काँटों से जानते हैं
किसी को क्या पता
प्यार दो अगर तो बबूल भी फ़ूल बरसाते हैं

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