रोशनी


आज रास्ता पार करते वक़्त मुझे वो मिला
बिना डगमगाए, घबराए लाठी टेकता वो अंधा मेरे साथ चला
वो भीड़ वो लोगों का रेला,
उस भीड़ में उसकी लाठी और वो अकेला
मैं तेज़ चलती गाड़ियों को देख कुछ सहमी लेकिन वो तो बस यूं चला
जैसे कह रहा हो किसी से क्या डरना भला
मुझे सब दिख रहा था, और वही मेरे डगमगाने की वजह बन चला
लेकिन वो अंधा था फ़िर भी उसका हर एक कदम नपा-तुला
क्योंकि जब अंधेरा ही रोशनी बन जाए तो फिर क्या गिला

#light

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