वो


बादलों से छनकर आती धूप में उसका साया
हवाओं में है उसकी आहट
पानी की झिलमिल में वो समाया
दूर पहाड़ी के सन्नाटे में उसकी आवाज़
उसके होने में गूँजे हर साज़
वो दिखता नहीं पर हर तरफ है उसका निशान
क्या यही है भगवान

वो दिन भर साथ होता है
तनहाई में हाथ थाम लेता है
कभी दूर से मुसकुराता है
कभी आहट से कभी खामोशी से गालों को सहलाता है
वो दुआ है, खुदा की नेमत है, क्या वही भगवान कहलाता है

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