सड़क


भीगी हुई सी सुबह है
बादल पहाड़ों को छूने आ रहे हैं
पत्ते अपने रंगों पे इतरा रहे हैं
कोई नहीं है फ़िर भी सड़क जा रही है
एक सिरे से उस सिरे तक चल रही है
थोड़ी ही देर में ये सड़क गूंजने लगेगी
इसपर से गुज़रते हुए
स्कूल जाते बच्चों की खिलखिलाहट में डूब जाएगी
वो गाड़ी जो खड़ी है
वो इस सड़क पर रफ़्तार से दौड़ेगी
कोई घर से निकलकर मंज़िल को चलेगा
कोई इस सड़क से होकर अपने घर के आँगन में घुसेगा
ये रोज़ रोज़ होता है
हम सोचते हैं सड़क खड़ी होती है
लेकिन सड़क चल रही होती है
कभी अकेली तो कभी सबके साथ
लेकिन इस सिरे से उस सिरे तक दौड़ रही होती है

#monteverde