शिवपुराण में कहा गया है…..
शिवपुराण में कहा गया है….दूसरों के प्रति हम जैसा व्यवहार करते हैं, वह अपने लिये ही फलित होता है । अत: ऐसे कर्म से बचें जो दूसरों को पीड़ा देने वाला हो ।
परं द्वेष्टि परेषां यदात्मनस्तद् भविष्यति ।
परेषां क्लेदनं कर्म न कार्य तत्कदाचन ।।
कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हम दूसरों को दुःख पहुचायेंगे तो उसके परिणाम में स्वयं भी दुःख ही प्राप्त करेंगे और दूसरों को सुख पहुचायेंगे तो स्वयं भी सुख ही प्राप्त करेंगे ।

आचार्य विपिन कृष्ण काण्डपाल