Agile

एक process थी अनजानी सी

एक product पे वो मरती थी

चोरी चोरी चुपके चुपके

उसे चिट्ठियाँ लिखा करती थी

कुछ कहना था शायद उसको

जाने किस मैनेजर से डरती थी

जब भी मिलती,

बस यही बोला करती

इस iteration में हम ये सीखेंगे

उस iteration में हम वो सीखेंगे

और मैं,

बस इतना ही सोच के रह जाता था…

ये क्या रायता फैला दिया है हमने भेनचोद!

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agile थी वो agile थी

कितनी सुंदर कितनी प्यारी

मस्त मगन मन मौजी

ना इससे कोई शिकवा

ना उससे कोई ग़म

ना किसी और को समझे कम ख़ुद से

ना माने ख़ुद को किसी और से कम

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किसी vertical की मोहताज नहीं

किसी manager की जायदाद नहीं

जब मन किया तो हाँ किया

मन भर गया तो भूल गए

पर agile तो agile थी

कही कोने में ढुकायिल थी

किसी त्रस्त डिज़ाइनर और एंजिनीयर के

ख़यालों में समायिल थी

कुछ कहना था शायद उसको

पर आख़िर हम सबसे ही वो रुसायिल थी

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agile तो बस agile थी

कितनी सुंदर कितनी प्यारी

मस्त मगन मन मौजी

ना किसी और को समझे कम ख़ुद से

ना माने ख़ुद को किसी और से कम

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फिर जब जब गम का मौसम छाया

सोमवार का काला साया लहराया

तडकता भड़कता, घनघोर बरसता

आँसूँ बनकर पलकों तक आया

सुबह नौ बजे अपने बिस्तर पर

तनहा इंजीनियर और डिज़ाइनर घबराया

agile ने प्यार से ये समझाया

की पगले आख़िर तो क्यूँ रोता है

हर sprint में यूँ ही होता है

ये daily standup में जो गहरे सन्नाटे है

ये वक़्त ने सबको ही बाँटे हैं

थोड़े blockers है सबका हिस्सा

ये मायूसी तो है सबका क़िस्सा

अरे पगले तू क्यूँ रोता है

हर sprint में ऐसा ही होता है

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depression की अग्नि में कभी ना जलिए

बुज़दिली उनके लिए है

जो managers की बकचोदी को

seriously लिए हुए है

याद रहे ये हमेशा

फ़िक्र की कोई नहीं है बात

इस बार ग़लती हो भी जाए

अगले iteration मैं हमेशा रहूँगी साथ

सीना तानिए, बेख़ौफ़ निक़लिये

हाँ लैप्टॉप बैग है भारी पर

iodex मलिए काम पे चलिए

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इस तरह हर बार नया मौक़ा देती

हिम्मत की पूड़ियाँ लिए

कितनी सुंदर कितनी प्यारी

मस्त मगन मन मौजी

agile थी वो agile थी

आधुनिक KV

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बस कुछ कहानियाँ है मन में, कहने के लिए बेताब हूँ