सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं, स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं, “अजेय” हूँ मैं.. Lunatic Poet from IIT Bombay, Budding Administrator
कुछ इस तरह तय हुआ सांसों का सफर
इस तरह तय हुआ सांसों का सफरकी जिंदगी थक गयी, मौत चलती रही
मेरे नसीब में ये सिगरेट ही है
वो भी क्या शाम होगी जब तुम मेरे होंठो से सिगरेट छुड़ा उन्हें चूम लो और कहो की छोडो ये बुरी आदते..तुम्हे चुनना होगा मुझमे और…
लौंडे अपने हिस्से के आंसू बहा चुके
और उस रात जब तुमसे मिल के आने के बाद सिगरेट जलाई तो वही बल्ब जो कभी उजाला देता था आज ऐसा लग रहा था मनो मेरे अंदर के…
Developing a taste taste for good Scotch, it comes with time
अकेलेपन को एन्जॉय करना इज लाइक डेवलपिंग अ टेस्ट फॉर गुड स्कॉच…इट कम्स विद टाइम….
स्कॉच के सुनहले गिलास के पीछे मोमबत्ती जल रही थी । लाईट कटी हुयी थी और गहरे अंधकार में सिर्फ उतनी सी रौशनी थी वो भी पूरी की पूरी स्कॉच में घुल रही थी । बहुत से…
लिखने के अपने अपने कारण होते हैं
पता है लिखने के अपने अपने कारण होते हैं । मैं देखता हूँ कि मुझे लिखने के लिए दो चीज़ों की जरूरत होती है । थोड़ी सी उदासी और…