
पारदर्शी
Aug 27, 2017 · 1 min read
पलट कर जब भी खुद को देखूं तो
क्यों सब कुछ इतना साफ दिखे
जिंदगी के हर जवाब में एक सवाल दिखे
क्यों ये सब कुछ मुझ को बार बार दिखे
बदल देता हूं हर उस खयाल को जो ठीक ना लगे
आखिर मेरा खयाल है मैं कुछ भी बदलू उसमें
तकदीर को नही बदल पाया तो क्या
कुछ जवाब ओर उनके सवाल तो बदल सकता हूँ
मेरी मिजाज की जो खुशी है
वो मेरे खयाल की बुनी है
मैने खुद ने बनाया है उसे
मेरे हर सवाल को बदल कर
कौन कहता है बदलना आसान नही है
तुम अपना जवाब तो बदल कर देखो
फिर देखो कैसे आपका हर सवाल बदलेगा
आखिर आप सभी भी गिरगिट ही हो
ये जो सब साफ नजर आ रहा है
ये सब उस गिरगिट का ही कमाल है!
