
तिरस्कार
Sep 6, 2018 · 1 min read
प्रेम में बार बार तिरस्कृत होना,
प्रेमी सहज स्वीकार करता है,
कभी कभी तिरस्कार,
मन को आनंदित कर देता है,
वह भाव अव्यक्त होता है,
जो महसूस किया जाता है,
दरअसल,
प्रेम अव्यक्त ही होता है,मुझे तुमसे,
व्याख्यारहित, अव्यक्त प्रेम है,
और प्रेम में तिरस्कार,
मुझे सजह स्वीकार है।
~Disgusting
