एक तुम हो जो पास भी नहीं

एक तुम्हारी याद है जो दामन छोड़ने को तैयार नहीं ।

एक इश्क़ है मेरा जो हर आरजू पूरी करने को हाजिर है

एक इश्क़ है तेरा जो मुकम्मल होने को भी राज़ी नहीं !

एक तुम हो जिसे ख्याल भी नहीं अब मेरे होने का

एक मैं हूं जिसे तुम्हारी याद में ख्याल भी नहीं सोने का !

यु तो ज़मी आसमा भी मिलते से लगने लगे है शाम ढलते ढलते

और एक तुम हो जिसे ख्याल ही नहीं मेरे होने का |

ना जाने क्यों तुम्हारी याद में लिखे जा रहा हूं

पता है तम्हे खबर भी नहीं , फिर भी तेरी ओर बढा चला आ रहा हूं

पता है मुझे तुम्हे पसंद नहीं मेरा यु मायूस होना

फिर भी तेरे ना होने के गम में

ये आंसू बहाये जा रहा हूं ||

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