FRIENDS THIS IS MY NEW POEM. THE POEM IS ABOUT A MARTYR WHO IS TELLING HIS STORY TO THE NATION.

साहीद की आवाज

“मैं एक सहीद बोल रहा हूँ ,

ए नादान देशवासी तुझे मैं अपनी काहानी बता रहा हूँ ।

खुद सजाकर अपनी कफन मैं उसपे सोने जा रहा हूँ ।

भारत माँ की गोदी मैं लेटे उसकी गारिमा गा रहा हूँ ,

मैं एक सहीद बोल रहा हूँ ॥ [१]

हेरान है तु भी ये सोचकर ,

पेहचान मेरा आज ढूंढकर ।

टूट गयी तेरी भी नींद सुनकर मेरी विजयगाथा ,

झुक गया है आज तेरा भी माथा ।

ले आज मैं तुझसे मेरा पेहचान करा रहा हूँ ,

मैं एक सहीद बोल रहा हूँ ॥ [२]

तु भी मस्त है तेरी जिंदेगी मैं ,

मैं भी खुस हूँ मेरे मोत से ।

मोत मेरी तेरी जिंदेगी से भी अछि है ,

क्यूंकी मेरा प्यार तेरे से भी सचि है ।

तु तो पागल है मासूका पर ,

जान कुर्बान है तेरी प्रेमिका पर ।

मेरी प्रेमिका तो वो है जिसे सिर्फ मेहसूस किया हूँ ,

मैं तो अपने देशपर दिलोजान हारकर बैठा हूँ ,

मैं एक सहिद बोल रहा हूँ ॥ [३]

तु तो पूजन करता बस एक माँ की ,

जनम देनेवाली वो प्यार भरी छावों की ।

पर मैं तो हूँ लाडला दो माओं की ,

पूजन करता हूँ मैं जनमदात्री और भारत माँ की ।

कीयूं तु मुझसे ईर्षा कर रहा है ,

यसोदा और देबकी दोनों को मैं मन मंदिर मैं बैठा रखा है ,

देख सहिद आज ये बोल रहा है ॥ [४]

पहन कर बलिदान का सेहरा ,

होने चला मैं जनाजे पर सवार ।

मोत को तु इंतजार करता रहगाया ,

और देख आज मैं अमर हो गया ।

अंत मेरा आगया मोत तुझे भी आयेगी ,

मगर तेरे सरीर पर तिरंगा कभी ना लिपटेगी ।

लिपट के तिरंगे मैं देख आज जा रहा हूँ ,

मैं एक सहिद बोल रहा हूँ ॥ [५]

वेसे हूँ तो मैं भी अपनी माँ का दुलारा ,

बूढ़े पिता का सहारा बहन का प्यारा ।

भाई का ताक़त और यारो का यारा ,

चल पड़ा हूँ सहादत की राह पर तो फिर ना लोटुंगा दुबारा ।

बलिदान देना है मुझे उस माँ की लिये जिसने जीवन को मेरा सवारा । [६]

याद तो मुझे भी आयेगी मेरी गावों की ,

वो पीपल की छावों की वो नदिया की नावों की ।

पर क्या करे समे वतन की लोह पर कुर्बान होने चला पतंगा ,

लहराके साने तिरंगा ।

मेरे मोत पर तो सारा देश रोयेगा ,

तु अपने जनाजे के लिये चार कंधा ढूंड्ता रहजाएगा ।

सच मैं आज ये बता रहा हूँ ,

मैं एक सहिद बोल रहा हूँ ॥ [७]

है ना मेरा कोई मजहब , ना कोई जात ।

नारी के लिये लख्मीबाई और पुरुस मैं सुभास बना हूँ ,

हिन्दू के लिये बिस्मिल बना हूँ मुसलमान का असफाक बना हूँ ।

पंडित के लिये आजाद बना हूँ खेत्रीय के लिये तात्या ,

सीख के लिये भगत बना हूँ ,

बना हूँ बंगाली का जतिन दाश

कलिंगा का जायी राजगुरु बना हूँ ,

फिर से एक आजादी लाया हूँ ,

सारी बर्बादी मिटाता चला हूँ ,

मैं एक सहिद बोल रहा हूँ ॥ [८]

कार्गिल की चोटी पर मनोज पांडे बन गुर्खा का शान बना हूँ ,

मुंबाई हमले मैं उनीकृष्णन बन माद्रासी का मान बना हूँ ।

मराठी तुकाराम बन कसाब पकड़ा हूँ ,

या फिर फते सिंह बन पठानकोट दुसमान की हड्डी तोड़ा हूँ ।

अंबाला का सपूत गुरुसेवक सिंह हूँ मैं ,

केरल का शान निरंजन हूँ मैं ।

आखिर एक सहिद हूँ मैं ॥ [९]

हमीद बन मैं पाकिस्तान की प्याटन उड़ाता हूँ ,

सौरभ कालिया , बिक्रम बत्रा , अनुज नायर ,जेसे बन दुश्मन के छके छुड़ाता हूँ ।

हिमालया की चोटी पर तिरंगा लहराता हूँ ,

माँ की खातिर खून की गंगा बहाता हूँ ,

मैं एक सहिद बोल रहा हूँ ॥ [१०]

होंगे तेरे पास बहुत पैसे ,

जियेगा जीवन तु कुबेर जेसे ।

पर बेताब मेरे दिल मैं एक बस्ती सी छाई है ,

सरफरोशी की तमना आज मुझे खींचकर सूली पर लायी है ,

यह देश को अलविदा कहने की वक़्त आयी है ।

मैं तो सब कुछ मादरेवतन पर निसार कर चुका हूँ ,

मैं एक सहिद बोल रहा हूँ ॥” [११]

AMRUTAMLAN SAMANTARAY(अमृतअम्लान सामन्तराय)

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