वक़्त(My poetry in hindi)

वक़्त हे आँखों का उजाला

वक़्त

वक़्त तो क्यों नहीं रोकता

एक पल के लिए,

हर तरफ दौड़ हे

इस वक़्त के वजह से

एक पल रुकजा,

और देख इंसान की थकान

पसीना सुख चूका हे

तेरा हर पल ! ओह वक़्त

तेरी थकान कहा गायब हे

कहा गायब हे तेरे करतब

तेरे वजह से इंसान

सब कुछ इस धरती छोड़ जाता हे

रिश्ते , इचछा और लालच

तेरा कुछ तो लक्ष्य होगा

क्या तोह राज करता हे

या इंसानों का आलस

हंसी आती तेरे होने पर

ना तेरी कोई पूजा करता हे

ना कोई तुझे आकर में ढाल सकता हे

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