माँ के सपनों का गुब्बारा

मेरी एक माँ है

वो मेरे सपनों के गुबारों में

उम्मीदों की हवा भरती है

चिड़िया सी सपने संजोतीं है

और उनको अपने परो पर रखती है

वो सोचतीं है

कि गुब्बारा एक दिन

आसमां में तैरेगा

क्या हुआ अगर उसके पास नहीं

मगर बुलंदियो को तो छुएगा,

अपने फेफड़ों की जमा पूंजी का

एक-एक कतरा खरचती है

मेरी एक माँ है

वो मेरे सपनों के गुबारों में

उम्मीदों की हवा भरती है

फिजा के काँटों सें,

फुस्स हो जानें के ख्वाब सें,

वो ना हारती है,

ना ही डरती है

मेरी एक माँ है

वो मेरे सपनों के गुबारों में

उम्मीदों की हवा भरती है

चिड़िया सी सपने संजोतीं है

और उनको अपने परो पर रखती है ।।

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