*मुक्त-हृदय से क्षमा करे *
मैंने जाने -अनजाने में,
जिनको जो भी पीड़ा दी हो।
उनसे नम्र निवेदन मेरा,
मुक्त-हृदय से क्षमा करें।।१।।
कभी-कभी आवेश प्रचुर ले,
अहंकारवश व्यंग्य किया हो,
बिना विचारे जिन्हें कभी कुछ-
यदि मैंने कुछ कष्ट दिया हो,
उनसे नम्र निवेदन मेरा,
मुक्त-हृदय से क्षमा करें।।२।।
प्रेम भाव से प्रेरित होकर,
घबराहट में कई बार तो,
निकल गयीं मुख से कुछ बातें,
जिनके अर्थ लगें हो उल्टे;
उनसे नम्र निवेदन मेरा,
मुक्त-हृदय से क्षमा करें।।3।।
स्नेह-भाव में मित्रों को भी,
कड़े शब्द यदि कह डाले हों,
उपदेशक बन रूखेपन से,
ताने दे कुछ कष्ट दिया हो;
उनसे नम्र निवेदन मेरा,
मुक्त-हृदय से क्षमा करें।।४।।
कुछ को लगा कि ‘मैं ज्ञानी हूँ,
मेरा है व्यक्तित्व बड़ा’,
उन्हें अगर आचरण दोषवश
मुझसे कुछ उलझनें मिली हों;
उनसे नम्र निवेदन मेरा,
मुक्त-हृदय से क्षमा करें।।५।।
“सत्यवीर” परिकर हैं निधियां,
मित्र सभी अनमोल सदा।
जो भी मिलते हैं जीवन में,
सबका अपना मूल्य बड़ा।।
सबसे नम्र निवेदन मेरा,
मुक्त-हृदय से क्षमा करें।।६।।
अशोक सिंह सत्यवीर


(पुस्तक – कुछ टेसू जो नजर न आये )