♤सुधि आये मनभावन की♤

सुधि आये मनभावन की।।१।।

पावस का मौसम मन भाये?
हिय में चैन नहीं टुक आये।
नभ में काले बादल छाये,
झड़ी लगी है सावन की।
सुधि आये मनभावन की।।२।।

आतीं शीतल-मंद फुहारें,
रोमांचित होते अंग सारे।
गरजें नभ में घन मतवारे,
गरज लगे समझावन की।
सुधि आये मनभावन की।।३।।

झूले पड़े बाग में सखि री! 
कजरी की धुन इत-उत बिखरी।
अजब खुमारी मन में उतरी,
सुन लूँ पिय गोहरावन की।
सुधि आये मनभावन की ।।४।।

बदल गयी रुत तन की, मन की,
कैसे कहूँ प्रियतम के छुवन की?
'सत्यवीर' पत इन अंखियन की,
आस गहे पिय आवन की।
सुधि आये मनभावन की।।५।।

अशोक सिंह सत्यवीर

(पुस्तक -लो! आखिर आया मधुमास )