हर बार सोचता हूँ की कुछ लिखना चालू करु लेकिन कभी शुरू नही कर पाया। शायद ये डर से कि ग्रामर खराब होगा, या स्ट्रक्चर खराब होगा. वैसे अपनी सोच भी एकदम फाडू है. कभी कभी एकदम कैमरा का फ्लैश की तरह चमकता है लेकिन वो चमक सिर्फ उतने ही देर के लिए रहती है. दिमाग में ही रह जाता है. कभी लिखने का या विडयो पे बोलने का कोशिश ही नही किया. वैसे मन तो करता है की मै…