हमारा समाज क्यों विधवा औरत को रंगीन कपड़े पहने से रोकता है|

Hindi News: हमारे समाज की सभी औरतो का गहना उनका सोल्लाह सिंगार ही होता है जिसे वह अपने जीवन में बहुत जरूरी समझती है जब किसी औरत की शादी होने के बाद उसके पति की अचानक मौत हो जाती है तो उस औरत को अपना सभी सोल्लाह सिंगार को छोड़ना पढ़ता है कहते हें एक औरत की पहचान उसके पति से ही होता है| विवाहित स्त्री का जीवन अनेक रंगों से भरा होता है वही दूसरी और विधवा औरत की ज़िन्दगी में केवल दुःख ही दुःख होता है|

पति के जाने के बाद औरतो को अपना सब कुछ छोड़ना पढ़ता है हमारा समाज विधवा औरत को सफ़ेद रंग के वस्त्र पहने के लिए बोलता है विधवा औरत सफ़ेद रंग के कपड़े को पहन के अपना जीवन व्यतीत करती है| ज्योतिषशास्त्र में भी बताया गया है विधवा स्त्री को सफेद रंग ही क्यों पहनाया जाता है|

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, सफेद रंग सर्वाधिक पवित्र और सात्विक रंग का प्रतीत है। विधवा स्त्री का पति विहीन जीवन कई संघर्षों से भरा होता है। ऐसे में विधवा स्त्री को ईश्वर की कृपा और सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सफेद रंग का लिबास उसे मनोबल और सात्विकता प्रदान करता है|

सफ़ेद रंग विदवा औरत के जीवन को सफलतापूर्वक बनाने में सफ़ल करता है और उसे जीवन की सारी चुनोतियों का सामना करने के लिए सहारा देते है| तो इसी कारण विधवा औरत को समाज सफेद कपड़े पहने को बोलता है|

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