अजनबी

Nishank Goyal

क्या भूलूँ क्या याद करूँ

मेरा दिल उन स्मृतियों में खोया है।

वो अजनबी जो मेरे अपने थे

उनके लिये कितने पहर रोया है।

हरेक आहट पर क्यों धड़कने बढ़ जाती थीं ,

हर पुकार भी कुछ अपनापन दे जाती थी ।

दिल के उबार ज्यों पलकों पर उबर आते थे,

और वही पल क्यों सपनों में आते जाते थे ।

जब एक द्वन्द दिल औ दिमाग़ में छिड़ जाता था,

तब वही अजनबी कुछ रूठता मनाता था ।

उनके जाने से अब तो शूल सा सन्नाटा है ,

बस यही प्रेम हमने संग-संग बाँटा है ।

हाँ …..हाँ यही प्रेम सबने संग -संग बाँटा है ।