आखिर क्यों विवाद मचा है तीन मूर्ति भवन को लेकर

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Sep 5, 2018 · 3 min read

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नई दिल्ली. देश की आजादी से पहले और बाद में अनेकों घटनाओं का जीवंत गवाह तीन मूर्ति भवन को लेकर केन्द्र की बीजेपी सरकार और कांग्रेस में आमने-सामने हैं. एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन मूर्ति भवन में देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों की याद में संग्रहालय बनाने की योजना बना रहे हैं वहीं कांग्रेस पार्टी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की याद में बनाए गए इस भवन के नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय में किसी भी प्रकार के छेड़छाड़ का विरोध कर रही है.

ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर तीन मूर्ति इतना क्यों खास है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताते हुए मोदी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं.

16 वर्ष तक इसी भवन में रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू:

नेहरु स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय की वेबसाइट नेहरु पोर्टल के अनुसार सन् 1946 में जवाहरलाल नेहरू जब वायसराय की कार्यकारिणी परिषद् के उपाध्यक्ष थे, 17 यॉर्क रोड, नई दिल्ली में रहते थे. जिसे आज मोतीलाल नेहरू रोड के नाम से जाना जाता है. यह स्थान भारत की स्वतंत्रता से संबंधित वार्ता के दौरान और उसके बाद भी कुछ समय के लिए मुख्यालय के रूप में प्रयोग किया गया. स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद पं.जवाहर लाल नेहरू 2 अगस्त 1948 को तीन मूर्ति भवन में आ गए जोकि प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास स्थान बन गया.

इतिहास का साक्षी है तीन मूर्ति भवन:

तीन मूर्ति भवन में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू की स्मृति में एक संग्रहालय बना है. जहां उनके जीवन की झलक आज भी यहाँ उनके छाया-चित्रों में देखी जा सकती है. सीढ़ीनुमा गुलाब उद्यान एवं एक दूरबीन यहां के प्रमुख आकर्षण हैं. इसी गुलाब उद्यान से नेहरु जी अपनी शेरवानी का गुलाब चुना करते थे. यहाँ हर शाम ध्वनि एवं प्रकाश कार्यक्रम का आयोजन भी होता है ट्रिस्ट विद डेस्टिनी जिसमें उनके जीवन और स्वतंत्रता के इतिहास के बारे में बताया जाता है.

तारामंडल बनने से पहले यहां एक टेनिस कोर्ट हुआ करता था, जहां कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनके भाई संजय गांधी अपनी किशोरावस्था में टेनिस खेला करते थे. तारामंडल की इमारत पत्थरों से बनी है जो पास ही बनी दूसरी ऐतिहासिक रचनाओं जैसी मुगलकालीन बनावट से एकरूपता रखती है.

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