दीपावली के पावन पर्व पर समर्पित

दीप ऐसे प्रज्वलित करें आज हम।

देश-परदेश में न बचे शेष तम।

सबके चेहरे पे झलके ख़ुशी ही ख़ुशी।

न हो कोई व्यथित न हो कोई दुखी।

आपसे न कभी कोई भी रुष्ट हो।

चाहे सज्जन हो कोई या कोई दुष्ट हो।

आपका शत्रु भी अब से संतुष्ट हो।

आज से प्रेम सर्वत्र परिपुष्ट हो।

Dr.Harnam Singh Yadav 'Ayaskant'