आतंकवाद के लिए युवाओं को उकसाता था जाकिर नाइक


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नई दिल्ली. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने विवादित प्रीचर जाकिर नाइक के खिलाफ गुरुवार को स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट पेश की। चार्जशीट में युवाओं को आतंकवाद के लिए उकसाने और हेट स्पीच देने का आरोप लगाया गया है। बता दें जाकिर जुलाई 2016 से देश से बाहर है। NIA ने 18 नवंबर 2016 को मुंबई ब्रांच में नाइक के खिलाफ केस दर्ज किया था।
चार्जशीट में 80 गवाहों के बयान
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, “65 पन्नों की चार्जशीट में नाइक पर हेट स्पीच और आतंक को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं। साथ में दिए गए दस्तावेजों में 1000 पन्ने हैं। इसमें 80 गवाहों के बयान भी दर्ज हैं। जाकिर पर आतंकियों की वित्तीय मदद करने और काले धन को सफेद बनाने का आरोप है।”
कौन हैं जाकिर नाइक?
- जाकिर का जन्म मुंबई में 18 अक्टूबर 1965 को हुआ था।
- उन्होंने एमबीबीएस किया है। नाइक एक मुस्लिम धर्मगुरु, राइटर और स्पीकर है।
- इसके अलावा वो इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन या आईआरएस का फाउंडर और प्रेसिडेंट है।
- फेसबुक पर उसके 1 करोड़ 14 लाख फॉलोअर हैं। नाइक पर यूके, कनाडा, मलेशिया समेत 5 देशों में बैन है।
- जाकिर के इस्लामिक फाउंडेशन को भारत और विदेशों से जकात के तौर पर भरपूर डोनेशन मिलता है। 
- वे एक स्कूल भी चलाते हैं जिसमें लेक्चर, ट्रेनिंग, हाफिज बनने की क्लास और इस्लामिक ओरिएंटेशन प्रोग्राम होते हैं।
- पुलिस की परमिशन न मिलने के कारण 2012 से मुंबई में नाइक की कोई पीस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई।
जांच के घेरे में क्यों आया जाकिर नाइक?
- इस साल 1 जुलाई को बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक रेस्टोरेंट में आतंकी हमला हुआ था। इसमें 2 पुलिस ऑफिसर और 5 हमलावरों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में यह भी बात सामने आई थी कि हमलावरों ने घटना के वक्त जाकिर नाइक की स्पीच का हवाला दिया था। इसके बाद ही नाइक और उसके एनजीओ विवादों में आ गए थे।
एनजीओ पर क्या हैं आरोप?
- आईआरएफ पर आरोप हैं उसे विदेशों से मिले चंदे का पॉलिटिकल यूज, धर्मांतरण के लिए इन्सपायर करने और टेरेरिज्म फैलाने के लिए यूज किया गया।
- मुंबई के चार स्टूडेंट्स जब आईएस में शामिल होने गए थे तब भी यह बात सामने आई थी कि वे जाकिर नाइक को फॉलो करते थे।
- आरोपों में घिरने के बाद होम मिनिस्ट्री ने आईआरएफ को मिलने वाले चंदे के सोर्स का पता लगाने का ऑर्डर दिया था। केंद्र सरकार ने नाइक की संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर पांच साल का बैन लगा दिया।