#15: तथास्तु

ना बादल उसको डरा सकते

ना बन्दे उसको जगाह सकते

ऐसी उसकी काया पलट

ना कोई उससे भुला सके

बर्फ उसको ना डरा पाई

बन्दे की क्या ही औकाद

पत्ते भी उसकी इजाज़त के बिना हिल्ले नहीं

सपूरण सृष्टि उसकी मुट्ठी में

जब नेत्र खुले

तोह जगत कल्याण ही कल्याण

मुख खुले तो निकला एक ही फरमान

तथास्तु

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