सूरजको उगते देखा

सूरजको उगते देखा

फूलों को खिलते देखा

तरह-तरह के बीजों को पौधे सा बनते देखा

इस बगिया के पेड़ों को फलते और फूलते देखा

नन्हीं-नन्हीं बूंदों से सागर को भरते देखा

झूमती लहराती बेलों को मुश्किलों से जूझते देखा

भांति-भांति के फूलों का गुलदस्ता हमने बनते देखा

मिलजुल कर आगे बढ़ने का स्वप्न साकार होते देखा

मीत यही है प्रीत यही है

भारत देश की रीत यही है

-कोमल दुआ

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