जाग / अमित

उठ जाग पथिक तू छोड़ धरा

तू बाट पकड़ कर घर को जा।

क्यों बैठ-बैठ कर लेट रहा

है लेट लेट कर ऊँघ रहा।

उठ अंधियाला हो जाएगा

तू जंगल में खो जाएगा।

तू घूम ज़रा , तू झूम ज़रा

तू अंधियाले में ज्योत जला

तू सही बाट की आस पकड़

तू साँस ले और साँस पकड़ (अर्थात प्राणायाम कर)

उजियाले का हाथ पकड़ (अर्थात आँखें खोल)

समय तेरे है साथ चला।

अब उजियाली हो गई बेला

सत को ढूंढ , ढूंढता जा

सत मिल जाए तो बन चेला

सत बाट तुझे दिखलाएगा।

तू बाट पकड़ कर घर को जा

क्यों बैठ-बैठ कर लेट रहा

है लेट लेट कर ऊँघ रहा

उठ अंधियाला हो जाएगा

तू जंगल में खोजाएगा