lekhraj

हिंदी का जितना हो सके प्रयोग करता हूँ और करने का प्रयास भी करता हूँ. कहानियां पढ़ना पसंद है, हिंदी में हो तो बात ही क्या.! और ब्लॉग भी लिखता हूँ.

    पवित्रता का दौर

    कभी-कभी मैं सोचता हूँ, हम कहां के पवित्र हैं? हम में से न जाने कितनों ने अपनी कलम को एक तरह से उस वैश्या की तरह बना दिया है, जो पैसों के लिए किसी के भी साथ सो जाती है।सुबह की डाक से चिट्ठी मिली, उसने मुझे इस अहंकार में दिन-भर उड़ाया कि मैं पवित्र आदमी हूं क्योंकि साहित्य का काम एक पवित्र काम है। दिन-भर मैंने हर मिलने वाले को तुच्छ समझा। मैं हर आदमी को अपवित्र मानकर उससे अपने को बचाता रहा। पवित्रता ऐसी कायर चीज है कि सबसे डरती है और सबसे अपनी रक्षा के लिए सचेत रहती है। अपने पवित्र होने का एहसास आदमी को ऐसा मदमाता है कि वह उठे हुए सांड की तरह लोगों को सींग मारता है, ठेले उलटाता है, बच्चों को रगेदता है। पवित्रता की भावना से भरा लेखक उस मोर जैसा होता है जिसके प…