उम्र की शोख़ियों को
निगाहों के सागर में समेटे,
सदियों की तड़प को
अपनी बाहों में जकड़ के,
खड़ा है वर्ष नया फिर
रूबरू आँखें अपनी बिछाए,
उमड़ती उम्मीदें नई
नज़रों में अपनी भर के।
चलो इक बार फिर
जीवन के महकते प्याले को
पल-पल होठों से लगा लें,
घूँट-घूँट पीकर इसे
वजूद अपना सजा लें।
चलो इक बार फिर
सितारों को भर के आँखों में,
उस खुले आसमान को
सीनों में अपने छुपा लें।
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