छुपी हुई मुस्कुराहट।।
छुपी हुई, सहमी हुई, काली बदली के पीछे,चांदनी सी नजर आयी है,
आज तेरी नम, सुर्ख आंखों के पीछे, मुझे मुस्कुराहट सी नजर आयी है।।
सौंप दिया तुने खुद को मुझे संभालने में,
आज पहली बार तेरी आंखों में नापी मैंने गहराई है।।
कोशिश क्या की होगी मैंने तुझे खुश रखने की,
तूने तो खुद को फना कर, की मेरी आशियाने की रहनुमाई है।।
आज भी याद करता हूं, तेरा मेरी ज़िन्दगी में आना,
अनसुलझे पन्नों को अपनाना और एक - एक कर सुलझाना।।
शिकवे भी रहे, शिकायतें भी रहीं,
पर कुछ तेरे, कुछ मेरे कंधों पे ज़िन्दगी चलती भी रही।।
खुद से भी गिरे, गिराए भी गए,
खुद से भी उठे और उठाए भी गए,
पर एक तेरा साथ हमेशा साथ रहा,
उसी वजह से हौसला बरकरार रहा।।
बढ़ेंगे आगे,देंगे और भी ज़िन्दगी के इम्तेहान,
डरना कैसा, एक दूजे का है साथ तो आए कोई भी तूफान।।
इस जनम में तो हम खिदमत से नवाजे गए हैं,
पर यह वादा है कि अगले में मुहब्बत लिखवा के लाएंगे।।
तुम यूं ही मुस्कुराते हुए हमें हर रोज मिलना,
हम मुस्कुराते हुए हर मुश्किल पार कर जायेंगे।।
छुपी हुई, सहमी हुई, काली बदली के पीछे,चांदनी सी नजर आयी है,
आज तेरी नम, सुर्ख आंखों के पीछे, मुझे मुस्कुराहट सी नजर आयी है।।
With love….. Manish Saluja
