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मंदिर वहीं बनाएंगे...
राम लला अब आयेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे|ज़न मानस मन भायेंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे||
विभीषण
अब बड़ी मुश्किल है लड़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है|मुश्किल है अब चढ़ाई,हर घर मे विभीषण बैठा है||
तुम सेंध लगाए बैठे थे,किसी दूसरे के घर पर,कोई तुम्हारा घर ही लूट गया,हर घर में विभीषण बैठा है||
मैं अकेला हूँ...
ना कोई दोस्त मेरा,ना है हमदर्द कोई,अपना कहने को तो कई,लेकिन अपनापन नहीं है|
ना कोई है हँसी,ना कोई ठिठोली करने वाला,दर्द देने को कई तैयार बैठे हैंलेकिन कोई…
क्या तुम मुझसे मिल कर, यूँ ही खो जाते हो|वैसे ही सपनों के समंदर मे, गोते खाते हो||
इस जीवन पथ पर....
जैसे मैं घुल जाती हूँ, तेरे यादो, जज्बातों मे|जैसे कई लोग मेरे कानो मे,सुन्दर गीत गाते हैं||
कि प्यार नहीं
ग़र प्यार का इजहार ना हो, तो वो प्यार नहीं|क्या हुआ जो तुमको, मुझ पर ऐतबार नहीं||
एक बार ऐतबार तो करो, पूरी शिद्दत से|फिर कह ना पाओगे, कि प्यार नहीं||