2018

A ghazal for the new year

नए साल में सब मोहब्बत कर रहे हैं
और हम हैं कि शिकायत कर रहे हैं

वक़्त तो आ गया है कि वक़्त बदले
पर हम फिर वही शरारत कर रहें हैं

‘अठरा में सुना है कि सब है माफ़
हम भी इंतेज़ार-ए-इनायत कर रहे हैं

लोग बनाने लगे हैं सपने हकीक़त
हम हकीक़त ही क़यामत कर रहें हैं

इजाज़त थी पढ़ने को एक ही मिसरा
हम फ़िर तौहीन-ए-इजाज़त कर रहें है

नए साल में सब मोहब्बत कर रहे हैं
और हम हैं कि शिकायत कर रहे है


Translation:

This New Year, everyone is busy loving
And here I am busy complaining

Surely, time has come for time to change
And here I am still troubling

There’s word that ’18 forgives all
And here I am waiting for compassion

People have started turning dreams to reality
And here I am turning my reality into apocalypse

I had permission to read out only one line
And here I am transgressing that permission

This New Year, everyone is busy loving
And here I am busy complaining

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