वो हैं ख़ुदा बस नाम के

Image Credit- SpiritofScripture

वो हैं ख़ुदा बस नाम के,

अहल-ए-वफ़ा अंजाम के|

जिनकी दुहाई मैं भरूँ,

जिनकी सदायें मैं करूँ-२,

रो-रो के सजदे मैं करूँ,

हंस-हंस के कलमे मैं पढूं-२!

उनके करम का शुक्रिया,

इस खाकपन का शुक्रिया-२!

पहले मुझे तनहा किया,

मेरा जिस्म मुझसे ले लिया,

फिर इश्क़ मेरा ले लिया,

हर उठती-घटती सांस ली,

फिर ले लिया दीवानापन,

मेरा अहतराम, मेरा भरम-२|

फिर सूफी मुझको कह दिया,

मैंने कहा जी शुक्रिया-२!

ये आसमान और ये धरा,

ये पर्वतो की श्रृंखला,

है हवा तेरी, है फ़िज़ां तेरी|

ये बंदिशें-वफ़ा तेरी

फिर मेरा मुझमे क्या बचा

क्यों सूफी मुझको कह दिया?

मेरी सांस, मेरी रूह की, ताबीर मुझको है कहाँ,

जो घटती बढ़ती है सदा, उस उम्र-ए-जां का शुक्रिया|

अब हाल मेरे इल्म का,

न जानता मैं, न खुदा|

अब न मैं बचा, न तू खुदा

हुई क़त्ल मेरी हर ज़फ़ा

ये जिस्म सूफी बन गया,

मैंने ढूंढ ली परछाइयां

मैं बन गया खुद का खुदा|

अहल-ए-वफ़ा = Faithful खाकपन = Earthiness/Pointless/Waste अहतराम = Respect भरम = Illusion इल्म = Knowledge ज़फ़ा = Hardship

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