शब्द

Monik Gupta
Aug 27, 2017 · 2 min read

कुछ शब्द अच्छे हैं
बयां करते है,
कुछ दिल का कर्ज
अदा करते है।

कुछ रुक जाते है
जहन में सहम कर
न जाने वो कितने
रिश्ते तबाह करते है।

कुछ उतर जाते
कागज के पन्नों पर
कभी हंसी तो कभी दर्द
के साथी हुआ करते है।

कुछ बेतूके फिसल जाते
जबां से
तो कुछ आघात कर
दिलों में रहा करते हैं।

कुछ शब्द, शब्द नहीं करते
बस इशारों में बसा करते हैं
कुछ थोड़े नज़ाकत भरे
कुसुम से अदाओं में खिला करते है।

कुछ सुसज्जित नवाब
महफ़िलों में रहा करते है
कुछ खुशनसीब यारों के
ठहाकों में घर करते है।

कुछ बदनाम होते है
घरों से बाहर रहते है
कुछ यारों को दिये नामों
में अकसर सुना करते है।

कुछ बाण होते है
अर्जुन के तीर का
तो कुछ बस कोरे
संकल्पों का नाद किया करते है।

कुछ उम्मीद होते है
हर एक सांस की
तो कुछ बस “राम”
ध्वनि किया करते है।

कुछ गुहार होते है
न्याय की
कुछ आस रखते है
एक स्वर्णिम बदलाव की।

कुछ हार बनते है
भाषणों के गलों में
तो कुछ अंटी मार कर
कसमों में बहा करते है।

कुछ फूल बनकर
दिल को छू लेते है
कुछ दोस्त बनकर
जीने का सहारा देते है।

कुछ पापा की डाँटो
की चिंता में समाते है
तो कुछ ममता का
दुलार निभाते है।

कुछ लाते है महासमर
भाई-बहन में
तो कुछ बस आहट होते है
जो की माँ के पैरों से आते है।

कुछ दुआएँ बनते है
राखी में खुद को लपेटे हुए
तो कुछ लालच
एक अच्छा उपहार मिलने की रखते है।

कुछ पढ़ाकू होते है
बस किताबों में बसते है
कुछ हीरो बनकर
नानी की कहानी में लड़ते है।

कुछ सबक होते है
बड़ों के अनुभवों का
कुछ आशीर्वाद बनकर
हमेशा सर पर रहते है।

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