तो अच्छा होता #untold

झूठे वायदों से कड़वा सच बोल देते, 
तो अच्छा होता। 
 बंजारे दिल को यूं मकसद ना देते, 
 तो अच्छा होता। 
मेरी रुसवाई में आकर अगुआई ना करते, 
 तो अच्छा होता। 
 इस बेपीर दिल को पीर ना देते, 
तो अच्छा होता।

कभी बैठकर गुफ्तगू का आलम जिया होता, 
तो अच्छा होता। 
इस कदर मझधार में मुझे तन्हा न किया होता, 
 तो अच्छा होता। 
तेरे दर्द को सीने में लिए चल रहे हैं हम,
कभी प्यार से इस दर्द को बांट लिया होता,
 तो अच्छा होता।

वक्त ने भी किए हंसी सितम कई,
 तू सितम होकर भी ,
कभी सितम लगा नहीं ।
जिस मोड़ पर छोड़ा था हाथ तूने मेरा,
 उस मोड़ पर कई बार आकर, बस रुका वहीं। 
 उस जगह खड़ा होकर,
 बस एक बात मैं सोचता रहा 
जिस पल तू ठहरा होगा ,
हर एक पल सुनहरा होगा ।
 उस पल को हर पल के लिए बस कैद कर लेते, 
तो अच्छा होता।

ये लफ्ज और लिबास तेरे, 
कायनात थी मेरी। 
बेतहाशा तुझे चाहना, 
एक इबादत थी मेरी। 
तुझे अपना बनाना एक नुमाइश थी मेरी, 
न छुड़ाकर मेरा हाथ, वो मोड़ लेते तुम, 
 तो अच्छा होता। 
इस दिल से वो दिल अपना जोड़ लेते तुम, 
तो अच्छा होता।

झूठे वायदों से कड़वा सच बोल देते, 
तो अच्छा होता। 
 बंजारे दिल को यूं मकसद ना देते, 
 तो अच्छा होता।

~naagin 🐍❤️

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