सफर #journey

Shivani Pandey
Jul 27, 2017 · 1 min read

मेरी शिद्दत का तूने इनाम क्या दिया,
इस मोहब्बत को तूने फ़रमान क्या दिया,
ताउम्र का साथ समझ रहा था मैं जिसे,
बेवफाई से इस रिश्ते का सर कलम किया।

एक वक्त था जब
हर रोज तेरी महफिल में आते थे,
इस छलकते शबाब को लबों से लगाते थे,
इतने बेबाक थे तेरी चाहत में हम,
कि शब्दों से तोला नहीं जा सकता
बस
इतनी मोहब्बत थी जो आप सह नहीं पाते
और हम कभी कह नहीं पाते।

तेरे जाने का अफ़सोस नहीं है कोई,
तुझे रोकने का अब शौक नहीं है कोई,
बस कुछ बातें बतानी है, कुछ गलतफहमियां हटानी है,
सुनकर बेशक खत्म करें ये किस्सा,
बार-बार इतिहास खोलने की वजह नहीं कोई।

अपने सफ़र में हूँ
चाहे भटकना पड़े, थमेगा नहीं।
में था मैं हूं और मैं रहूंगा
बस इंतजार है मुझे भी आज भी
की मिलेगी ये दो लहरें कभी-ना-कभी
खैर
यह बातें अब बस दबी है कहीं
मुझे विश्वास है मेरा वक्त आने से पहले
कहूंगा कुछ नहीं।

~naagin 🐍❤️

    Shivani Pandey

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