सफ़ा समझ कर पलट दिया #LikeJustAnotherPage

एक अरसे बाद उसे मेरा ख्याल आया, 
मिलने को आतुर मन उसने हमें बताया, 
कुछ उतना ही वक़्त लगा
 उस किस्से से हमें उभरने में, 
 जितने वक़्त बाद उसका फिर से पैगाम आया।

न रखी है, न बांधी है कोई उम्मीद 
यही बात हम सब से कहते रहे.. 
अंदर ही अंदर न जाने कब, 
उम्मीदों के पुल बनते रहे।

न जिक्र किया, ना कहा, 
ना इजाज़त दी सोचने की। 
 हमने हर वक़्त सिर्फ कोशिश की 
इन जज़्बातों को रोकने की।

कुछ कहने सुनने के लिए
 न उसे वक़्त ने कभी फुर्सत दी, 
ना उसने खुद को इजाजत। 
 और हम तो पागल ही थे, 
न जाने किस चीज़ की कर रहे थे इबादत।

मुलाकातों के सिलसिले अब बंद हो चुके हैं, 
 बातों में भी हमारी दूरियों के अंश दिख चुके हैं।

था वक़्त नहीं किसी के पास
 किसी ने बुनियाद को सही नहीं माना
 न जाने जिंदगी क्या चाहती है... 
कोई उसका भी सुन ले बहाना।

इस वक़्त के अंतराल में 
 बदलाव इतना आया, 
 मशक्कत बाद यह दिल 
 उन तमाम गलियों से निकल पाया।

क्या खूब मुकाम था इस सफर का भी....

मेरे होने का वजूद भी उसने...
 सफ़ा समझ कर पलट दिया,
मैंने इस अजीज किस्से को 
तजुर्बे की अलमारी में रख दिया।

~naagin 🐍❤️

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