चंडी हड़हड़ाई
जब शाह-ए-देव इन्द्र को आसुर ने भाग डराए |
धन दौलत ओ खूब रूप, न किसी ने दी सहाए ||
फिर बिसन देव के दर गयो, पूछे कैसे उन्हें हराये |
तब बिसन देव ने आखिआ, दुर्गा ही तुम्हे बचाए ||
दुर्गा ही तुम्हे बचाए ||
राजा दुर्गा के घर गयो, और पूरी कथा सुनाया |
कैसे महिश दैत ने देवों का घर लुटाया ||
कैसे फ़ौज-ए-राक्ष ने महिलाओं को भी मारा |
हाथ जोड़ के इन्द्र कहे — अब तू ही मेरी सहारा |
चंडी तू ही मेरी सहारा ||
हँकारी इन्द को देख के, अब दुर्गशाह मुस्कुराई |
रूप-ए-मौत धारण कियो, और अपनी सिंघ बुलाई ||
धनुष वाण खंडा किर्पान, हर अस्त्र बस्त्र सजाई |
महाकाल की देवती फिर जोर से हड़हड़ाई ||
श्री कालिका हड़हड़ाई ||

टिपणी
ये मेरी हिंदी में कविता लिखने की पहली प्रयास है | श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी की महान कविता “चंडी दी वार” में एक हिस्सा आती है जिसमे इंद्रा देव दुर्गा के घर जाकर उसकी मदद की बिनती करता है , और चंडी उनकी कहानी सुन के जोर से हस्ती है | उसी हिस्से को मैंने हिंदी ज़ुबान में पेश की है |
अर्थ
कालिका = दुर्गशाह = चंडी = दुर्गा
इन्द = इन्द्र = इन्द्रा
धन दौलत ओ खूब रूप = धन, दौलत, और खूबसूरती (उर्दू कविताओं में अक्सर इस “ओ” शब्द को इस्तमाल करते है, जिसका फार्सी में मतलब है “और”)
हड़हड़ाई = जोर से हसना (ये लफ्ज़ “चंडी दी वार” में मौजूद है)
महिश दैत = महिषासुर (एक मशहूर और शक्तिशाली राक्षस)
आखिआ = कहा
Transliteration
jaba śāha-e-deva indra ko āsura ne bhāga ḍarāe |
dhana daulata o khūba rūpa, na kisī ne dī sahāe ||
phira bisana deva ke dara gayo, pūche kaise unheṃ harāye |
taba bisana deva ne ākhiā, durgā hī tumhe bacāe ||
durgā hī tumhe bacāe ||
rājā durgā ke ghara gayo, aura pūrī kathā sunāyā |
kaise mahiśa daita ne devoṃ kā ghara luṭāyā ||
kaise fauja-e-rākṣa ne mahilāoṃ ko bhī mārā |
hātha joḍ ke indra kahe — aba tū hī merī sahārā |
caṃḍī tū hī merī sahārā ||
ham̐kārī inda ko dekha ke, aba durgaśāha muskurāī |
rūpa-e-mauta dhāraṇa kiyo, aura apanī siṃgha bulāī ||
dhanuṣa vāṇa khaṃḍā kirpāna, hara astra bastra sajāī |
mahākāla kī devatī phira jora se haḍhaḍāī ||
śrī kālikā haḍhaḍāī ||
