आज मन गोते लगा रहा है,कल्पना क सागर में ,डुब जाने को आतुर ,प्यार के उस गागर में |सावन के बदल भी लगे है, रिमझिम बरसाने में ,कोई मुझको बुला रहा है, हृदय के खाली कोने में |पृथवी भी आतुर है बादलो से तृप्ति पा जाने में ,और हवा भी ढृढ़ है उन बदलो को हटाने में |बार बार मन विकल होता…
जो दुख में ढलता है , उसी के लिए सुख की खान है ,
वह जो विपदाओं में पलता है ,अंततः वही महान है |
आज मानव की नीयत को देखो ,
ना पवित्र मन ना जबान है |
Most often we hear of Global Warming,Weather Imbalances, Earth quacks etc etc. I mean the environment is badly hampered.The main reason is cutting tress,building homes,offices for our need.Have we ever thought of how would we feel if someone comes & devaste our…