मिल रहे अपने अजनबी बनकर जाने क्यूँ

सदियाँ बीती युग बीता दौर वह पुराना बीता 
 नए जग के जलधारे में खेल वह पुराना जीता 
 २ 
 कुछ बात और हो तो वह भी बताओ 
 संग अपने लाये जो वह हमे दिखाओ 
 ३

 सुर सागर का समर गीत है , जाने कौन रूठ गया है 
 जाने कितने दिनों बाद कोई रास्ता भूल गया है
 ४ 
 आज अचानक नदियाँ सुखी 
 प्यास की नयी परिभाषा सीखी 
 ५ 
 सोचो जग यह ख़त्म हो जायेगा 
 कौन फिर दीपक यहाँ जलायेगा 
 ६ 
 बढ़ते रहे गलत पथ पर पथिक जाने क्यूँ 
 मिल रहे अपने अजनबी बनकर जाने क्यूँ 
 ७ 
 पहचान कैसे जाता है अपना पराया 
 मिटता नहीं क्यों है बीते कल का साया
 ८ 
 आओ तुमको जग दिखलाये 
 अपने पराये का अंतर बताये 
कल औ कल का भेद समझाये 
 ९ 
 रुक क्यों नहीं जाता है , बीत नहीं क्यूँ जाता है 
 लम्हा बहता जाता है मगर याद छोड़ जाता है 
 १० 
 एक रंग में सबकुछ रंग दो , सब आसान हो जाए तब 
 खोजो अँधेरे में अपना घर , सब बर्बाद हो जाए जब 
 ११ 
 कहता तो हूँ , करता मगर नहीं हूँ 
 सुनता तो हूँ , पूछता मगर नहीं हूँ


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