मौन क्यों हो महात्मा , जग सवाल करता है। सामने कोई नहीं है ,मानव खुद से ही डरने लगा

१
मौन क्यों हो महात्मा , जग सवाल करता है
कौन से चिंता में डूबे , मग सवाल करता है
२
अपनी बात अपने पास रखो , कोई नहीं कहता है
बाँट दो गम सारे अपने , जो हर कोई सहता है
३
उड़ना चाहता था गगन में , सुन चूका था, गीत मधुर सारे
मिलना चाहता था समंदर से , देख चूका था, वचन कटु सारे
४
कहाँ का पता था तुम्हारे पास , आये नहीं अभी तक
पूछना मुनासिब नहीं समझा , गए नहीं अभी तक
५
आये क्यों थे इस जगह पर , कुछ याद भी है तुम्हे
बताया नहीं उन्होंने मुझे , प्रतिपालक जाना जिन्हे
६
भरोसा गैरो पर था खुद से ज्यादा , हार होनी थी
समाज पूछता क्यों नहीं है उनसे , कहानी जिनकी थी
७
भूल कर भुला देना आदत नहीं , पुछा मगर, जानना चाहा नहीं
सोचो की कौन करता है शिकायत सबकी , कोई समझता नहीं
८
नहीं मुश्किल है फैसला लेना , आगे बढ़ना और बढ़ते जाना
कई एक बार तो कई लोग , भूल जाते पीछे मुड़ कर देखना
९
खोने लगा जब अस्तित्व , अंधेरा है घिरने लगा
सामने कोई नहीं है ,मानव खुद से ही डरने लगा
१०
हज़ारों सपने देखे , हर सपने पर मिटने को तैयार था
कमीं उसी में थी , दुनिया मिटाने को तैयार मगर था
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