सच बोल आज शिकायत नहीं है

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१ 
 परखना छोड़ करतब कुछ नया सोच 
 मित्र पुराना खेल छोड़ अब नया सोच 
 २ 
 देखती कैसे है दुनिया तुझको 
 सोचता पर क्यों है ऐसा खुदको 
 ३ 
 समक्ष सर्वस्व संसार तैरता जाता है 
 और तू पूछता है वह कहाँ जाता है 
 ४ 
 नियम के तहत सब छीन गया 
 कीमत चुकाई सब मिल गया 
 ५ 
 प्रेरणादायक गीत तुम्हारे नहीं है 
 सच बोल आज शिकायत नहीं है
 ६ 
कैसे तू कहता रहता है खुद को शक्तिशाली 
 बाहर सब हरा भरा और अंदर बिलकुल खाली 
 ७

 एक नया घर भी बनाया 
 मिलने पर कोई न आया 
 ८ 
 महसूस मगर कुछ भी न हुआ 
 ज़हर का असर अब भी न हुआ 
 ९ 
 अधूरा कार्य पूर्ण तुझको करना था 
 होती सुबह कुछ देर धीरज धरना था
 १० 
 उलझ अपने मायाजाल में मनुष्य भयभीत होता है 
 आदि अंत का अन्तर जाने कहाँ पर ख़त्म होता है


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