It creates a false dichotomy where one is forced to choose between having an affordable and robust payments network or censorship resistance, as if the two were mutually exclusive.
It’s Not the Censorship Resistance, Stupid
John Blocke
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आप इतनी जल्दी ज्यादा हैरान परेशान मत

होना हैं ।जब दौ चलता दौङता हैं।पहले को

छोङ त्याग दे ले तो भी तीसरा आय टपक जाता आता रहा देखा होता हैं।एक तीसरा

कभी कभी होता देखा हैं।वो दुनिया संसार मे होता देखा मैने यानि मात्र केवल एक आँख नहीं यह समझ देख औंरत आदमी

चुन बिन्नती बोलती कहती पंसद मर्जी ,फिर

भी एक जानकारी समझ रख लेता हैं।वह मोती मूल का नहीं यानि ब्याज सूद की आय कमाई है। कुत्तों को रोटी माँस का पहरेज शिकवा नहीं हैं।जबकि कबूतरों का

दाणा अनाज एक नहीं ,फिर भी कंकर पत्थर भी खाना भूख पूरी सही कर देना है।

वैसे ही जगत धरती पर वो दौ नहीं ,तीसरा आदमी नहीं हैं।केवल एक नैत्र का नुमाईंदा

नोमीनी यानि प्ररोक्सी वोटर मतदाता हैं।

उसका बजूद शून्य जीरो भी नहीं ,फिर भी

आकाश धरती की तरह जीरो शून्य अंश काल माना हैं। अब हम ओर आप कहानी

जीवनी उस बेहद पसंद खूबसूरत जीरो शून्य नहीं।हीरो सुपरस्टार धरती धरा के शासक राजा हैं नहीं तो पहरेदार सिपाही।

अब आप मुझसे ज्यादा अधिक सभ्य शालिन व धन दौलत नहीं।आकाश पृथ्वी के

मालिक ईश्वर कह देख सक लेना है उचित सही हैं।गरीब निर्धन गाय हैं।घौङे की पहचान जान हार्सपावर शक्ति जान लेना तो

जीरो शून्य से ज्यादा छोटा मोटा नहीं हैं।फिर धेनु गाय का मुकाबला तुलना तुलसी से कम ज्यादा नहीं।ज्ञान बुद्धि ही नहीं क्या ।सारा सागर व महासागर एक छदाम बराबर नहीं।आज समझ की हैं।ओर कल फिर नहीं हैं।काल समय सब मे हैं।इतना काफी।