घटहा नासी और कुर्सा माछ (Ghataha stream and Goni fish_Labeo gonius)
सावण का महिना था | मैंने रोज की तरह अपनी छोटी सी तियैर[1] को घर के पास से बहने वाली धारा घटहा में स्थित एक खेत में बहुत कम पानी लगा आया | बाढ़ के समय एक ही रात में पानी का स्तर बहुत जल्दी बढ़ जाता है | दुसरे दिन सुबह जब मैं उठा तो मालूम हुआ कि बाढ़ का पानी आया है और नदी नाला सब कुछ पानी से भर रहा है | मैं झटपट उठा और अपनी जाल उठाने को दौरा |
[1] जिसे अंग्रेजी में गिल नेट कहते हैं
मेरे पहुचने से पहले ही मेरा परोसी सुरेश वंहा पहुच चुका था | उसने बताया की कुर्सा माछ का अवार(School of fish moving together) आया है | मैंने जब अपना तियैर उठाया तो वह मुझे बहुत भाड़ी महसूस हुआ | दुसरे ही पल जाल ने मुझे पानी में खीचना शुरू कर किया | पहले तो मैंने सोच कि पानी के बहाव की बजह से जाल मुझे खिंच रहा है | पर जब मैंने जाल उठाया तो मैं दंग रह गया क्योंकि जाल पूरा फान के फान २५० ग्राम के कुर्सा मछों[1] से भरा हुवा था |
[1] एक तरह का कार्प_ Labeo gonius
मैंने बहुत कोशिश की मगर जाल उठा नहीं पाया | अंत में हार-मान ली और फिर मैंने अपने दादाजी को आवाज़ लगाया | वो दौरे दौरे आये और देखा कि कैसे मैं जुंज रहा हूँ और किस तरह से मछलियाँ मुझे पानी में खींचे जा रहे अहिं | वो पानी में उतारे और फिर मैंने और दादाजी ने पूरा जाल मछली सहित पानी से बाहर निकला | इतने में मेरी माँ भी पहुँच गई और जाल से माछ निकलने में हमारी मदद करने लगी |
मुझे आज भी विश्वाश नहीं होता की कैसे उस छोटी सी जाल में ११ किलो कुर्सा मछ फानों फान भरा हुवा था | कभी-कभी जरुरत ज्यादा हाशिल कर लेने पर लोग ख़ुशी के मारे घबरा जाते हैं, मेरे साथ उस दिन ऐसा ही कुछ हुवा था |
